What is Surrogacy Meaning in Hindi | जानिये सरोगेसी से जुड़ी कम्पलीट जानकारी

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What is Surrogacy Meaning in Hindi : बदलते समय के साथ – साथ विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है जिसके कारण आज की दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं रह गया है। विज्ञान के इन्हीं चमत्कारों में से एक है सरोगेसी (Surrogacy) जो किसी कारण से मां नहीं बन पाने वालीं महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं तो इस आर्टिकल में हम सबसे पहले जानेंगे What is Surrogacy Meaning in Hindi.

Content: What is Surrogacy Meaning in Hindi

What is Surrogacy Meaning in Hindi (सरोगेसी का हिन्दी अर्थ)

सेरोगेसी साइंस, बच्चे पैदा करने की एक नई तकनीक है। इसमें अगर माता या पिता दोनों में काई भी शारीरिक कमजोरी की वजह से बच्चा पैदा करने में सफल नहीं हो रहे हैं तो वो इस तकनीक का सहारा लेकर बच्चा पैदा कर सकते हैं। Surrogacy में किसी दूसरी महिला की कोख को किराये पर लिया जाता है। कोख को किराए पर लेने के बाद आईवीएफ के जरिए शुक्राणु को Surrogate Mother की कोख में प्रतिरोपित किया जाता है और इसी प्रक्रिया को सरोगेसी कहा जाता है।

What is Surrogate Mother in Hindi (सरोगेट मदर क्या है)

जो महिला किसी अन्य दंपत्ति के बच्चे को अपनी कोख में पालती है उसे सेरोगेट मदर (Surrogate Mother) कहा जाता है या फिर ऐसे कहें कि सरोगेसी प्रक्रिया को करने वाली महिला को सरोगेट मदर कहा जाता है। सरोगेट मदर बनने का निर्णय महिला की इच्छा से ही होता है। इसमें किसी भी तरह की कोई जबरदस्ती नहीं होती है।

माता-पिता और सरोगेट माँ के बीच एक एग्रीमेंट किया जाता है कि भ्रूण बनने के बाद से लेकर बच्चे के जन्म तक की देख-रेख उनकी निगरानी में होगी और बच्चे पर केवल माता-पिता का ही हक होगा।

इस प्रक्रिया में माता-पिता को इंटेंडेड पेरेंट्स (Intended Parents) कहा जाता है और तीसरे पक्ष को प्रजनन पक्ष (Third Party Reproduction) कहा जाता है। इसके अलावा सरोगेट मदर को प्रेग्नेंसी के दौरान अपना ध्यान रखने और मेडिकल जरूरतों के लिए पैसे दिए जाते हैं।

सरोगेसी कितने प्रकार की होती है (Types of Surrogacy)

इस आर्टिकल में आपको बता रहे हैं What is Surrogacy Meaning in Hindi, तो आइये अब जानते हैं कि सरोगेसी कितने प्रकार की होती है. सरोगेसी दो तरह की होती है – पहली ट्रेडिशनल सरोगेसी और दूसरी जेस्टेशनल सरोगेसी।

ट्रेडिशनल सरोगेसी (Traditional Surrogacy in Hindi)

ट्रेडिशनल सरोगेसी में पिता के शुक्राणुओं को किसी अन्य महिला के अंडे के साथ निषेचित किया जाता है। इस सरोगेसी में बच्चे का जैनेटिक संबंध सिर्फ पिता से होता है।

जेस्टेशनल सरोगेसी (Gestational Surrogacy in Hindi)

जेस्टेशनल सरोगेसी में आई.वी.एफ के ज़रिए माता-पिता के अंडे व शुक्राणुओं को लेकर भ्रूण तैयार किया जाता है जिसको फिर सरोगेट मदर के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में बच्चे का जैनेटिक संबंध माता-पिता दोनों से होता है। इस सरोगेसी प्रक्रिया में सरोगेट माँ का बच्चे के साथ कोई भी आनुवंशिक संबंध नहीं होता है।

सरोगेसी की प्रक्रिया (Process of Surrogacy)

हमारे आर्टिकल What is Surrogacy Meaning in Hindi अब जानते हैं इसकी प्रक्रिया के बारे में कि किस प्रकार इसका इस्तेमाल किया जाता है। सरोगेसी की प्रक्रिया में नि:संतान कपल जो बार – बार गर्भपात या फिर आई.वी.एफ. फेल होने पर ही इस तकनीक का प्रयोग कर सकते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में अस्पताल और डॉक्टर का परमिशन जरुरी है जिनकी मदद से ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। संतान की चाहत रखने वाले दंपति द्वारा सरोगेसी के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य महिला को चुना जाता है जो पुरुष के स्पर्म को 9 महीनों के लिए अपने कोख में रखती है जिसके बाद एक नि:संतान दंपति को संतान और सरोगेट मदर को पहले से तय की गई एक निश्चित राशि दे दी जाती है।

कहां से आई सरोगेसी?

आईये अब जानते हैं इसकी मुख्य वजहें क्या हैं? इसका कोई एक कारण नहीं है लेकिन इसकी 2 मुख्य वजहें हैं:

महिलाओं में बांझपन

इसका पहला कारण बांझपन है चूंकि समाज में औरत को मां बनने पर ही पूरा माना जाता है। मां का मतलब सिर्फ ममता ही नहीं होता बल्कि अपनी कोख में बच्चे को पालना भी होता है लेकिन कुछ महिलाएं जो शारीरिक कमियों से मां बनने में सक्षम नहीं होती हैं, उन्हें समाज कई तरह की उलाहना देता है जिसे कोई भी औरत सहना नहीं चाहती।

हालांकि शादीशुदा जोड़े का माता-पिता बनने का सपना किसी अनाथ बच्चे को गोद लेकर भी पूरा हो सकता है लेकिन हमारे देश में लोग रूढिवादिता के कारण खून का रिश्ता सबसे बड़ा मानते हैं। आज जब विज्ञान ने किराए की कोख पर खुद की जेनेटिक विशेषताओं के साथ मां-बाप बनने का विकल्प दिला दिया है तो ऐसे जोड़े इसे अपने लिए ज्यादा वरदान समझते हैं।

हाइटेक बच्चों की चाहत

विदेशों में बांझपन का कॉंसेप्ट तो लागू नहीं होता पर उनके लिए इसके प्रति आकर्षण का कारण अपनी चाहत के अनुकूल अपने बच्चे को बनाना है। आम बच्चे जो प्राकृतिक रुप से जन्म लेते हैं वो अपाहिज भी हो सकते हैं या दिमाग, शारीरिक रूप से कमजोर या आइंस्टीन-न्यूटन जैसा तेज दिमाग, गोरा – काला, नाटा – लम्बा जैसा भी हो सब भगवान की देन मानी जाती है। इस पर माता पिता का कोई वश नहीं होता है लेकिन वैज्ञानिक विधि से माता – पिता बनने में ये सारी चीजें  अपनी चाहत के अनुकूल निर्धारित कर सकते हैं तो आज के युग में लोगो की हाइटेक बच्चों की चाहत के चलते भी विदेशों में सरोगेसी का चलन बढ़ रहा है।

क्यों ले सेरोगेसी का सहारा

  • कई कोशिशों और दवाओं के इस्तेमाल के बाद भी अगर गर्भपात हो रहा हो तो सेरोगेसी का सहारा ले सकते हैं।
  • जिन महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है, हार्ट प्रॉब्लम है या फिर किसी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के चलते वो गर्भ धारण नहीं कर पा रही हैं तो वो सेरोगेसी का सहारा ले सकती हैं।
  • भ्रूण आरोपण उपचार सफल ना होने के बाद सेरोगेसी के जरिए मां बना जा सकता है।
  • गर्भाशय या श्रोणि विकार होने पर मां बनने के लिए सेरोगेसी का सहारा जा सकता है।

सरोगेसी का खर्च (Cost of Surrogacy)

आशा है आपको हमारा आर्टिकल What is Surrogacy Meaning in Hindi पसंद आ रहा होगा तो अब जानते हैं कि इसका खर्च कितना आता है। भारत में सरोगेसी की प्रक्रिया में करीब 10 लाख से 25 लाख तक का खर्च आता है वहीं विदेश में सरोगेसी के लिए करीब 60 लाख रुपये तक का खर्च आता है।

भारत में सरोगेसी (Surrogacy in India)

पहले भारत में सरोगेसी एक अनजान तकनीक थी लेकिन पिछले कई सालों से लोग इसके बारे में जानने लगे और इसका लाभ उठा रहे हैं। भारत में इसकी शुरुआत साल 2002 से हुई। भारत में सरोगेसी को चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) बढ़ाने के लिए वैध किया गया था लेकिन इसके बाद धीरे – धीरे भारत सरोगेसी का केंद्र बन गया।

एक रिपोर्ट के मुताबिक सरोगेसी के सबसे ज्यादा मामले भारत में ही होते हैं। अगर पूरी दुनिया में सरोगेसी के एक साल में 500 मामले हैं तो उनमें से 300 मामले भारत से होते हैं। CII द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सरोगेसी का व्यापार 2 अरब डॉलर प्रति वर्ष है और देश में करीब 3000 हजार से ज्यादा फर्टिलिटी सेंटर इसमें शामिल है।

भारत के कुछ खास स्थानों में सेरोगेसी सबसे ज्यादा फैला है जैसे उड़ीसा, भोपाल, केरल, तमिलनाडु, मुंबई आदि जगहों पर सरोगेसी सबसे ज्यादा होती है। इस तकनीक का सहारा आम लोगों के साथ – साथ फिल्मी सितारे जैसे आमिर खान, शाहरुख खान, शिल्पा शेट्ठी, करन जौहर, एकता कपूर, तुषार कपूर तक ले चुके हैं।

भारत में सरोगेसी के लोकप्रिय होने का कारण

जैसा कि हमने बताया कि पूरे विश्व में सबसे ज्यादा Surrogacy भारत में होती है। भारत में इस प्रक्रिया के लोकप्रिय होने का कारण निम्नलिखत है:

  • सरोगेसी से संबंधित कोई मजबूत कानून का ना होना।
  • बेरोजगारी और गरीबी भी इसका मुख्य कारण है क्योंकि इसकी वजह से सरोगेसी के लिए महिलाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
  • चूंकि भारत में सरोगेसी सस्ती है इसलिए विदेशी भी किराए की कोख के लिए भारत की ओर रुख करते हैं।
  • भारत में सरोगेसी के नियम हैं जो निम्न हैं:
  • सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे पर जेनेटिक माता-पिता का हक होगा। इसमें किसी घोषणा की जरूरत नहीं होती है।
  • बच्चे के जन्म-प्रमाण पत्र में जेनेटिक माता-पिता का नाम ही होना चाहिए।
  • सरोगेसी कांट्रेक्ट में सरोगेट मदर के जीवन बीमा का उल्लेख निश्चित रूप से होना चाहिए।
  • सरोगेट बच्चे के जन्म से पहले अगर जेनेटिक माता – पिता की मृत्यु हो जाती है या फिर उनके बीच तलाक हो जाता है या उनमें से कोई बच्चे को लेने से मना कर देता है तो बच्चे के लिए आर्थिक सहयोग की व्यवस्था की जाए।

सरोगेसी से संबंधित समस्याएं

सरोगेसी के अनियमित व्यवसाय ने कई समस्याओं को जन्म दिया है। व्यवसायिक सरोगेसी के कारण दलालों और वाणिज्यिक एजेंसिंयो को सबसे ज्यादा लाभ होता है जिससे उत्पन्न समस्याएं निम्नलिखित हैं:

  • सरोगेट मदर का शोषण।
  • सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे का परित्याग, भ्रूण आयात और अंग व्यापार।
  • कई मामले ऐसे भी देखने को मिले हैं जिसमें भावनात्मक आवेश में आकर सरोगेट मदर बच्चे को दंपति को देने से इंकार कर देती है जिसके कारण सरोगेट मदर और दंपति के बीच कानूनी विवाद जैसी समस्याएं जन्म ले लेती हैं।
  • बच्चे के विकलांग पैदा होने पर या किसी और स्वास्थ्य संबधी समस्या के चलते दंपति बच्चा लेने से इंकार कर देते हैं।
  • सरोगेसी से हुए बच्चे की नागरिकता से संबधित विवाद।
  • सरोगेसी से संबंधित सेवा देने वाले अस्पतालों पर नियंत्रण ना होना।
  • सरोगेसी का चिकित्सकीय सेवा के बजाय चिकित्सकीय सुविधा के तौर पर इस्तेमाल होना जिसका प्रयोग अविवाहित लोग तथा दंपति भी कर रहे थे।

कमर्शियल सरोगेसी (Commercial Surrogacy)

सरोगेट मदर बच्चा पैदा करने के लिए जब दंपत्ति से पैसे लेती है तो इसे कमर्शियल सरोगेसी कहते हैं। हर देश में कमर्शियल सरोगेसी के अलग-अलग नियम हैं। वहीं अगर भारत की बात करें तो भारत में कमर्शियल सरोगेसी वैध नहीं है। वर्ष 2009 की 228वीं रिपोर्ट में कानूनी मदद से लॉ कमीशन ऑफ इंडिया ने सरोगेसी को वैध कर दिया था लेकिन कमर्शियल सरोगेसी को पूरी तरह से बैन रखा गया था।

परोपकारी सरोगेसी (Altruistic Surrogacy)

Altruistic Surrogacy में सरोगेट के रूप में कार्य करने के लिए सरोगेट मदर को कोई वित्तीय भुगतान या अन्य इनाम नहीं मिलता है। हालांकि, उसे इच्छुक माता – पिता द्वारा गर्भावस्था से जुड़े किसी भी चिकित्सा व्यय और सामान्य लागतों के लिए प्रतिपूर्ति की जाती है। भारत में Altruistic Surrogacy ही चलती है क्योंकि यहां पर Commercial Surrogacy पर रोक है।

सरोगेसी बिल 2020

साल 2020 में केंद्रीय कैबिनेट ने सरोगेसी (रेगुलेशन) बिल को मंजूरी दे दी। इसमें पैरंट्स न बन पाने वाले कपल्स के अलावा कोई भी महिला, जो मां बनना चाहती है वो सरोगेट मदर का सहारा ले सकती है। इसमें तलाकशुदा महिलाओं और विधवा महिलाओं को भी शामिल किया गया है।

सरोगेट मदर बनने के लिए उम्र 35 से 45 साल के बीच होनी चाहिए। वहीं सरोगेट मदर का बीमा कवर जो पहले 16 महीने हुआ करता था अब उसे बढ़ाकर 36 महीने कर दिया गया है। भारतीय विवाहित जोड़े व देश से बाहर रह रहे भारतीय मूल के विवाहित जोड़े और अकेली भारतीय महिलाएं कुछ नियम व शर्तों के साथ सरोगेसी लाभ ले सकती हैं।

इसके अलावा यह विधेयक यह भी सुनिश्चित करता है कि इच्छुक दंपति किसी भी स्थिति में सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे को छोड़ नहीं सकते हैं। नवजात बच्चे को वो सभी अधिकार होंगे जो एक प्राकृतिक बच्चे को मिलते हैं।

भारत में सरोगेसी कानून (Surrogacy Laws in India)

अन्य देशों की तुलना में भारत में सरोगेसी करना आसान है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Medical Research Council) ने साल 2002 में जरूरी दिशा निर्देशों के साथ सरोगेसी को कानूनी वैधता दे दी थी। लोकसभा में संशोधन के साथ पारित हुए रेगुलेशन बिल 2020 की खास बातें इस प्रकार हैं:

  • व्यवसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध है।
  • अविवाहित महिला या पुरुष, समलैंगिक, सिंगल या फिर लिव इन में रहने वाला जोड़ा सरोगेसी के लिए आवेदन कर सकता है।
  • 25 वर्ष से 35 वर्ष की महिला ही सरोगेट बन सकती है।
  • Surrogate Mother बनने के लिए महिला का शादीशुदा और एक बच्चे की मां होना जरुरी।
  • अंडाणु और स्पर्म देने पर प्रतिबंध।
  • सरोगेसी के बदले पैसे या किसी भी मौद्रिक लाभ देने पर रोक।
  • Surrogacy के लिए बनाए गए प्रावधानों का उलंघन करने पर इसके बिल में 10 साल की सजा और 10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।

सरोगेसी के लिए योग्यता

हमने आपको बताया What is Surrogacy Meaning in Hindi लेकिन इसके लिए निम्न योग्यताओं का होना भी जरुरी है जो सरोगेसी के लिए अनिवार्य है:

  • वो दंपति जो किसी प्रमाणित इनफर्टिलिटी से पीड़ित हों।
  • सरोगेसी किसी व्यवसायिक उद्देश्य के लिए ना हो।
  • बच्चे का जन्म बिक्री, वेश्यावृति या शोषण के लिए ना किया जा रहा हो।
  • कानून द्वारा विनिर्दिष्ट कोई स्थिति या बीमारी ना हो।
  • इच्छुक दंपति के पास समुचित अथॉरिटी द्वारा जारी अनिवार्यता प्रमाण पत्र और योग्यता प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है।
  • निम्नलिखित स्थितियों में अनिवार्यता का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है:
  • जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा इच्छुक दंपति में से एक या दोनों सदस्यों का प्रमाणित इनफर्टिलिटी सर्टिफिकेट जारी किया गया हो।
  • मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा सरोगेट बच्चे के पेरेंट्स और कस्टडी के लिए आदेश जारी किया हो।
  • 36 महीने का बीमा कवरेज हो जो सरोगेट मदर की प्रसव के बाद की जटिलताओं को कवर करता हो।
  • निम्नलिखित शर्तें पूरी करने के बाद ही दंपति को योग्यता का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है
  • इच्छुक दंपति भारत के नागरिक हों और शादी को कम से कम 5 साल पूरे हो चुके हों।
  • दंपति में पत्नी (महिला) की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच हो और पति (पुरुष) की उम्र 25 से 55 के बीच हो तो ही योग्य माने जाएंगे।
  • दंपति के पास कोई बच्चा (गोद लिया हुआ, सरोगेटेड या बॉयोलॉजिकल) ना हो, इसमें वो बच्चे शामिल नहीं हैं जो मानसिक बीमारी से पीड़ित हों या किसी प्राणघातक बीमारी से जूझ रहे हैं।
  • या कोई ऐसी स्थिति जिसे रेगुलेशनों द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।

सरोगेट मां बनने के लिए योग्यता

समुचित अथॉरिटी से योग्यता प्रमाण पत्र लेने के लिए सरोगेट मदर को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना जरुरी है:

  • महिला का विवाहित होना जरुरी है और उसका मां होना जरुरी है।
  • महिला की उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • इससे पहले महिला ने कभी सरोगेसी ना की हो।
  • महिला के पास सरोगेसी के लिए मेडिकल और मनोवैज्ञानिक फिटनेस का सर्टिफिकेट हो।

अपराध एवं दंड का प्रावधान

विधेयक में दंड का भी प्रावधान है जिसके अनुसार कामर्शियल सरोगेसी, उसका विज्ञापन करना, सरोगेट मदर का शोषण करना, सरोगेट बच्चे का शोषण करना या उसको अपनाने से इंकार करना या फिर सरोगेसी के लिए मानव एंब्रयो, गैमेट्स को बेचना या फिर उसका आयात करना। ये सभी अपराध माने जाते हैं औऱ इनकी न्यूनतम सजा 10 साल की कैद और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना है।

सरोगेसी बन जाती है बहस का मुद्दा

आजकल सरोगेसी एक विवादास्पद मुद्दा भी बनता जा रहा है। ऐसे कई मामले आए हैं जिसमें भावनाओं में आकर सरोगेट मदर ने बच्चा पैदा होने के बाद बच्चे को उसके कानूनी मां-पिता को देने से इंकार कर दिया।

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वहीं कुछ मामले ऐसे भी हैं जो और भी ज्यादा गंभीर हैं जिसमें जब बच्चा विकलांग पैदा हो जाए या फिर जब करार एक बच्चे का हो और जुड़वा बच्चे पैदा हो जाएं तो जेनेटिक माता-पिता बच्चे को लेने से इंकार करने लगते हैं।

अब सवाल ये उठता है कि क्या नौ महीने तक पेट में रखने और जन्म देने वाली Surrogate Mother का बच्चे के प्रति भावनात्मक प्रेम क्या कानूनी कागजों में दस्तखत कराने के बाद खत्म किया जा सकता है? और क्या जन्म से पहले उसे पता होता है कि बच्चा विकंलाग होगा या जुड़वा?

दोस्तों आशा है आपको हमारा आर्टिकल What is Surrogacy Meaning in Hindi पसंद आया होगा और सरोगेसी से सम्बधित आपके जितने भी प्रश्न है उनके उत्तर आपको मिल गऐ होंगे फिर भी यदि आपको लगता है कि हमारे आर्टिकल में कहीं कोई गलती है तो कृपया हमें कमेंट के जरिये अवश्य बताऐं ताकि दूसरे लोगों के पास कोई गलत जानकारी न जा सके।

Source : Google

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