Ganesh Ji Ki Murti खरीदते समय क्या ध्यान रखें | गणेश जी की मूर्ति घर में कहां रखें

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दोस्तों, आज के हमारे इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं। Ganesh Ji Ki Murti खरीदते समय क्या ध्यान रखना चाहिए। विघ्नहर्ता गणेश जी को सुख, समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ से पहले भगवान गणेश को याद किया जाता है तथा उनकी पूजा की जाती है। भगवान गणेश (Ganesha) देवो के देव महादेव भगवान शिव और माता पार्वती के छोटे पुत्र हैं।

भगवान गणेश की दो पत्नियां है जिनका नाम है रिद्धि और सिद्धि। रिद्धि और सिद्धि भगवान विश्वकर्मा की पुत्रियां है। भगवान गणेश के दो पुत्र भी है जिनका नाम शुभ (बड़े बेटे) और लाभ (छोटे बेटे) हैं इसके साथ ही भगवान गणेश की एक पुत्री भी है जिन्हे हम संतोषी माता के रूप में पूजते हैं।

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गणेश जी अनेक नामों से जाने जाते है लेकिन उसके प्रमुख 12 नाम है:

  • सुमुख
  • एकदंत
  • कपिल
  • गजकर्णक
  • लंबोदर
  • विकट,
  • विघ्न-नाश
  • विनायक
  • धूम्रकेतु
  • गणाध्यक्ष
  • भालचंद्र
  • गजानन

Ganesh Ji Ki Murti खरीदते समय क्या ध्यान रखें

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गणेश जी की मूर्ति बहुत ही शुभ मानी जाती है ताकि हमारे घर और ऑफिस में हमेशा समृद्धि बनी रहे। ऐसे में गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय हमें कुछ बातो का ध्यान अवश्य ही रखना चाहिए जो इस प्रकार हैं।

  • गणेश जी की सूंड का खास ध्यान रखें
  • मूषक वाहन का ध्यान रखें
  • गणेश जी के हाथ में मोदक या लड्डू हो इस बात का ध्यान रखें

गणेश जी की सूंड का खास रखें ध्यान

Ganesh Ji Ki Murti में सूंड का बहुत बड़ा महत्व है। गणपति जी की सूंड की एक अलग ही गाथा है। भगवान गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय उनकी सूंड किस दिशा में बनाई गई हैं उस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।

गणेश जी की मूर्ति में उनकी सूंड हमेशा उनके बाएं (Left) हाथ की तरफ मुड़ी हुई होनी चाहिए। बाएं हाथ की तरफ मुड़ी हुई सूंड वाली मूर्ति खरीदने से आपको लाभ होता है। दांई (Right) हाथ की तरफ मुड़ी हुई सूंड वाली मूर्ति लाभकारी नहीं मानी जाती हैं।

बाज़ार में मिलने वाली गणपति जी की कुछ मूर्तियों में दोनों तरफ, दांई और बाईं तरफ सूंड वाली मूर्ति कभी भी नहीं खरीदनी चाहिए। अपने पूजा घर में आपको गणेश जी की केवल एक ही मूर्ति रखनी चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि गणेश जी की एक से ज्यादा मूर्तियां रखने से रिद्धि-सिद्धि नाराज़ हो जाती है और आपके घर में बरकत नहीं होती है।

मूषक वाहन का ध्यान रखें

गणेश जी के वाहन मूषक राज (चूहा) की कथा भी किसे नहीं पता होगी। गणपति बप्पा की मूर्ति खरीदते समय हमें ये भी ध्यान रखना चाहिए की उनकी मूर्ति में उनका वाहन मूषक जरूर ही होना चाहिए।

गणेश जी के हाथ में मोदक या लड्डू होना चाहिए

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Ganesh Ji Ki Murti लेते समय आपको उनके पसंदीदा मिष्ठान मोदक का भी ध्यान रखना चाहिए। गणपति जी की मूर्ति में अगर मोदक बाएं हाथ में हो और साथ ही भगवान गणेश की सूंड भी उसी दिशा में हो तो वह मूर्ति बहुत ही शुभ मानी जाती है। ऐसी मूर्ति की स्थापना घर में करने से आपका घर धन,संपत्ति और समृद्धि से भर जाएगा।

हमने आपको Ganesh Ji Ki Murti खरीदते समय क्या-क्या ध्यान रखना चाहिए वो तो बता दिया लेकिन अब सवाल है कि गणेश जी की मूर्ति को घर में कहां रखना चाहिए।

गणेश जी की मूर्ति घर में कहां रखें

गणेश जी को घर में रखने से पहले आपको मालूम होना चाहिए की भगवान गणपति को आपको किस दिशा में स्थापित करना है। आपको गणेश जी की मूर्ति को अपने घर की उत्तर दिशा में स्थापित करना चाहिए। उत्तर दिशा में गणेश जी की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है और आपके लिए यह बहुत लाभकारी होगा। यदि आप किसी कारणवश उत्तर दिशा में भगवान गणेश को स्थापित नहीं कर सकते हैं तो आप अपने घर की पूर्व या पश्चिम की दिशा में भी उनकी मूर्ति स्थापित कर सकते हैं।

लेकिन ध्यान रखे भूल से कभी भी गणेश जी की मूर्ति को दक्षिण दिशा में स्थापित नहीं करना चाहिए। अगर आपके घर का मंदिर घर की सीढ़ियों के नीचे है तो भी आपको किसी भी भगवान की मूर्ति को वहां स्थापित नहीं करना चाहिए ऐसा करने से भगवान का अपमान माना जाता है।

घर के जिस कोने में टॉयलेट हो या कोई भी गंदगी हो वहा भी भगवान गणपति की मूर्ति को नहीं रखना चाहिए।

यदि आप भगवान Ganesh Ji Ki Murti को घर में स्थापित कर रहे है तो ध्यान रखे की आप कोई ऐसी मूर्ति खरीदें जिसमे भगवान गणेश जी बैठे हुए हो और उनके पैर ज़मीन पर स्पर्श हो रहे हो। इससे सफलता आपके कदम चूमेगी।

Ganesh Ji Ki Murti खरीदते समय क्या ध्यान रखें और घर में गणेश जी की मूर्ति को कहां रखना चाहिए वो भी आप जान चुके हैं तो आइए आपको कुछ ओर जानकारी दे देते है जिससे आपका जीवन सुख समृद्धि से भरपूर हो जाएगा।

गणपति को घर कैसे लाएं

गणेश भगवान को घर में लाने से पहले आपको ऊपर दी गई जानकारी को ध्यान रखते हुए गणपति बप्पा की मूर्ति खरीदनी है।

घर की उत्तर, पूर्व या पश्चिम जिस भी दिशा में आप भगवान गणेश को स्थान देना चाहते है उस कोने को अच्छे से पानी से धो कर साफ सुथरा कर ले। अपने घर को इस तरह सजाएं कि जब बप्पा आपके घर में प्रवेश करें तो ये सब तैयारियां देख कर प्रसन्न हो जाएं और आपको आशीर्वाद प्रदान करें।

घर के जिस कोने में आप गणपति जी को विराजमान करने वाले है उस स्थान पर कुमकुम से एक स्वास्तिक बनाएं। बनाए हुए स्वास्तिक पर 4 हल्दी की बिंदी भी लगाए। एक मुट्ठी अक्षत (चावल) रखें जिसके ऊपर आपको एक चौकी या पाटला रखना है। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।

चौकी के आस-पास फूलो की सुंदर सजावट करें तथा अच्छे से उजाला भी करें इसके लिए आप बाज़ार में उपलब्ध लाईट्स का प्रयोग भी कर सकते हैं। यहां क्लिक करके आप कुछ बेहतरीन लाईट्स ऑनलाईन आर्डर कर सकते हैं। ध्यान रहे आसपास अंधेरा नहीं होना चाहिए।

जब आप Ganesh Ji Ki Murti को लेने जाए तो नए कपड़े पहने। पुरुष सिर पर टोपी या रूमाल रखें। गजानन को लेने जाते समय चांदी की थाल ज़रूर लेके जाएं ताकि आप गणेश जी की मूर्ति उस पर रख कर घर ला सकें। अगर चांदी का थाल नहीं है तो आप तांबे या पीतल की थाल भी ले जा सकते हैं और यदि आप थाली नहीं ले जाना चाहते हैं तो लकड़ी का पाटला भी ले सकते हैं।

घर की मालकिन गणेश जी को घर की चोखट पर रोकें और खुद घर में रूक कर गणेश जी की पूजा करे और उनकी आरती उतारें। फिर गणेश जी को घर के अंदर प्रवेश कराएं और उनको उनके स्थान पर स्थापित करें। पूरा परिवार एक साथ मिल कर गणेश जी की कपूर से आरती करे और भोग लगाएं। भोग के लिए मोदक या लड्डू होना बहुत आवश्यक है।

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ऐसे ही प्रतिदिन सुबह शाम गणेश जी की पूजा अर्चना करें, उनकी आरती उतारें और मोदक, लड्डू, पंच मेवा प्रसाद में रखें।

गणेश जी का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

गणेश जी का मुख हमेशा उत्तर, उत्तर–पूर्व, पूर्व–पश्चिम की तरफ होना चाहिए। उत्तर, उत्तर–पूर्व, पूर्व–पश्चिम दिशा में गणपति का मुख होना शुभ माना जाता है। अगर आपके गणपति का मुख दक्षिण दिशा की ओर है तो आपको उनकी दिशा उत्तर, पूर्व या पश्चिम की ओर कर देनी चाहिए।

गणेश चतुर्थी के लिए कौन सी गणेश मूर्ति अच्छी है?

गणेश चतुर्थी के लिए आपको हमेशा मिट्टी की बनी मूर्ति की घर में लानी चाहिए। आप चाहें तो घर पर ही मिट्टी से गणेश जी की मूर्ति बना सकते हैं। इसके अलावा, सफेद मदार की जड़ से बने गणपति की मूर्ति को पूजना बहुत ही शुभ माना जाता है। अगर आप मिट्टी या मदार की जड़ से बनी मूर्ति नहीं रखना चाहते है तो आप सांस, चांदी या तांबे से बनी मूर्ति की पूजा भी कर सकते हैं।

Ganesh Ji Ki Murti मूर्ति लेते समय हमेशा ध्यान रखें की आपको कभी भी प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) या अन्य केमिकल्स से बनी मूर्ति नहीं खरीदनी चाहिए और न ही उसकी पूजा करनी चाहिए।

गणेश जी की कौन सी मूर्ति शुभ होती है?

गणेश जी की वही मूर्ति शुभ मानी जाती है जो मिट्टी से या सोने, चांदी, तांबे की धातु से बनी हुई हो। अगर आप क्रिस्टल की मूर्ति भी रखते हैं तो वो भी बेहद शुभ मानी जाती है।

गणेश की मूर्तियां कैसे बनाई जाती है?

गणेश जी की मूर्ति बहुत प्रकार से बनाई जाती है। कहीं मिट्टी से, तो कहीं पत्थर से भी मूर्तियों को बनाया जाता है। गाय के गोबर से बनी हुई Ganesh Ji Ki Murti को बहुत ही शुभ माना जाता है। कुछ लोग भगवान गणेश जी की प्रतिमा खुद ही अपने हाथों से बनाना पसंद करते हैं जो बहुत ही इकोफ्रेंडली (Ecofriendly) भी होती है जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान भी नहीं होता है।

अगर आप भी अपने हाथों से गणेश जी की मूर्ति बनाना चाहते है तो चलिए हम आपको मूर्ति बनाने में लगने वाली सामग्री तथा घर पर भगवान गणेश की मूर्ति कैसे बनाए, वह भी बता देते हैं।

Ganesh Ji Ki Murti बनाने की सामग्री:

  • पेपरमेशी मिट्टी (Paper Mache) जो किसी की स्टेशनरी शॉप पर आसानी से मिल जाती है
  • फिनिशिंग के लिए ब्रश
  • मिट्टी की मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले औजार या चाकू
  • एक बोर्ड
  • पॉलिथीन

Ganesh Ji Ki Murti बनाने की विधि:

  • सबसे पहले आप एक प्लेन जगह पर बोर्ड को रखे और उस बोर्ड पर पॉलिथीन को टेप की मदद से अच्छे से चिपका ले।
  • पेपरमैशी मिट्टी को लेकर बोर्ड पर लगी हुई पन्नी पर तब तक गूंधें जब तक मिट्टी हाथ में चिपकनी बंद हो जाए। अगर आपके पास मिट्टी का पाउडर है तो आप उसमे फेविकोल या गोंद डाल कर गूंध लें।
  • अब इसे आटे की तरह तैयार कर के उसे 3 बराबर हिस्सों में बांट लें।
  • अब उन तीन हिस्सों में से एक हिस्सा ले और उसे भी 2 बराबर हिस्सों में बांट लें।
  • इन दो हिस्सों में एक हिस्से को लेकर हमे बेस बनाना है जिस पर गणपति जी विराजमान होंगे। बेस बनाने के लिए उस हिस्से को लेकर गोला बना ले और हल्के-हल्के हाथों से उसे चपटा कर लें।
  • अब इसके दूसरे हिस्से को ले कर एक अंडे का आकार बनाएं जिससे आप गणपति जी का पेट बना सकें।
  • बड़े भाग का काम समाप्त हुआ। अब दूसरा बड़ा गोला लें और उसे बराबर 4 हिस्सों में बांट लें। इन 4 हिस्सों से गणेश भगवान के दो हाथ दो पैर बनेंगे।
  • हाथ पैर बनाने के लिए सभी हिस्सों को एक-एक पाइप का आकार दे और उसके बाद इन सभी को किसी भी एक तरफ से पतला कर लें।
  • इन सभी 4 हाथ पैरों को बीच में से मोड़कर वी (V) शेप का आकार दें। अब आप बेस को बोर्ड के बीच में रखें और मिट्टी से बने पैरों को लेकर बेस के ऊपर आलथी पालती मुद्रा में रख दें।
  • अब अंडाकार गोले को लेकर पीछे से पैरों के ऊपर चिपका कर रखें।
  • अब किसी औज़ार या हल्के हाथ से पैरों और पेट की बीच की मिट्टी को आपस में चिपका लें।
  • इसके बाद हमे मूर्ति पर हाथ लगाने हैं। हाथों को लगाते समय हमें मोटे हिस्से की तरफ से एक-एक छोटा गोला निकलना है और उनसे कंधे बनाने हैं।
  • अब हाथों और कंधो को आपस में जोड़ दें। ध्यान रहे हाथों की लंबाई मूर्ति के अनुसार ही रखें। गणेश जी के दाईं हाथ को थोड़ा सा मोड़कर आशीर्वाद की मुद्रा बनाएं और बाएं हाथ को प्रसाद वाली मुद्रा में बनाएं और उस पर छोटा सा मोदक बना कर रख दें।
  • दूसरे हिस्से का काम भी खत्म हुआ अब तीसरे बड़े हिस्से को लें और उसे 4 बराबर हिस्से में बांट लें।
  • इनमे से एक हिस्से को 2 भाग में बांट लें और एक भाग को लेकर गणेश की गर्दन बनाएं और दूसरे भाग को गोल आकार देकर Ganesha का सिर बनाएं और फिर दोनों भागों को जोड़ कर दोनो हाथों के बीच में चिपका दें।
  • अब दूसरे भाग को लेकर सूंड का आकार दे और सिर के साथ जोड़ दें।
  • अब तीसरे हिस्से को लेकर एक गोला बनाएं और उसको चपटा करके बीच में से काटकर दो हिस्से कर लें। ये दो भाग गणेश जी के दो कान बन गए हैं। इन दो कानों को सिर से जोड़कर चिपका दें।
  • अब इसी गोले का एक छोटा हिस्सा लेकर कोन शेप बना ले और सर पर मुकुट की जगह रख दें।
  • अब आखरी चौथा हिस्सा ले कर उसमे से थोड़ी मिट्टी निकाल कर बप्पा के दांत बनाए और इस बात का ध्यान रखें की बाएं (Left) हाथ के तरफ वाला दांत पूरा होगा और दाएं (Right) हाथ के तरफ वाला दांत आधा होगा।
  • अब बची हुई सारी मिट्टी से भगवान गणेश का वाहन मूषक (चूहा) बनाएं। चूहा बनाने के लिए बची हुई मिट्टी के 3 भाग कर लीजिए। एक भाग को अंडाकार आकार दे कर चूहे का पेट बनाए। दूसरे भाग के 3 हिस्से कर ले और उससे चूहे के दो कान, सिर और पूंछ बना लें। तीसरे भाग के 4 हिस्से कर ले और उससे चूहे के 4 पैर बना लें।

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लीजिए ऐसे आपकी इकोफ्रेंडली Ganesh Ji Ki Murti बन कर तैयार हो गई है। इस मूर्ति को पक्का करने के लिए इसे छांव में 3-4 दिन तक रखना होगा। आप चाहे तो इस मूर्ति में रंग भर कर इसे और सुंदर बना सकते हैं।

अभी तक हमने बताया कि Ganesh Ji Ki Murti खरीदते समय क्या ध्यान रखना चाहिए और आपको मूर्ति किस प्रकार की लेने चाहिए साथ ही घर में गणेश जी की स्थापना कैसे करनी चाहिए सब बता दिया है। अब हम आपको बताऐंगे कि ऑफिस में कैसे गणेश जी रखने चाहिए और कहां रखने चाहिए, वो भी बता देते हैं।

ऑफिस में गणेश जी की मूर्ति कहां रखनी चाहिए?

ऑफिस में गणेश जी को हमेशा उत्तर दिशा, पूर्व दिशा या पश्चिम दिशा की ओर ही रखना चाहिए। अगर आप गणेश जी मूर्ति नहीं रखना चाहते हैं तो भगवान गणेश जी का कोई चित्र (Ganesh Ji Ki Murti Ki Photo) भी अपने ऑफिस में लगा सकते हैं लेकिन तब भी आपको भगवान गणेश जी का चित्र उत्तर दिशा, पूर्व दिशा या पश्चिम दिशा की तरफ ही लगाना चाहिए।

जब आप अपने ऑफिस में गणेश जी को विराजमान कराना चाहते हैं तो आपको उनकी मूर्ति लेते समय भी कुछ बातो का ध्यान रखना होगा। जैसे कि, ऊपर दी गई जानकारी में हमने आपको बताया था कि हमेशा बाएं तरफ मुड़ी हुई सूंड वाली मूर्ति ही खरीदनी चाहिए इसके साथ ही आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि जब भी आप आपने ऑफिस के लिए गणेश जी की मूर्ति खरीद रहे हैं तो आपको ये अवश्य ध्यान रखना है कि हमेशा खड़े हुए गणेश जी की मूर्ति खरीदनी चाहिए।

घर में रखने के लिए आप Ganesh Ji Ki Murti बैठी हुई मुद्रा में ले सकते हैं लेकिन आपको अपने ऑफिस में रखने के लिए भगवान गणेश की मूर्ति हमेशा खड़े हुए वाली मुद्रा में ही लेनी चाहिए।

दाई सूंड वाले गणेश जी कैसे होते है?

जिस मूर्ति में गणेश जी की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई होती है उन्हे दक्षिण मूर्ति या दक्षिणाभिमुखी मूर्ति कहा जाता है। सरल शब्दों में कहे तो इसका अर्थ है दक्षिण दिशा या दाईं बाज़ू।

दक्षिण दिशा यमलोक की तरफ ले जाने वाली दिशा होती है इसलिए दाई सूंड वाले गणेश जी को शुभ नही माना जाता है।

दाई तरफ मुड़ी हुई सूंड वाली मूर्ति तांत्रिक साधना हेतु काम में लाई जाती है। इसलिए कभी भी भूल से आपको घर में गणेश जी को रखने के लिए दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति नही लाने चाहिए।

हमने आपको बताया था की जिस प्रतिमा में गणेश जी की सूंड बाएं (Left) हाथ की तरफ मुड़ी जिसे वाममुखी भी कहा जाता है बहुत ही शुभ मानी जाती है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि बाईं ओर चंद्र नाड़ी होती है जो शुभ होती है।

Sapne Me Ganesh Ji Ki Murti Dekhna

अगर किसी व्यक्ति को सपने में भगवान गणेश, किसी भी रूप में दिखते है तो वह बहुत ही शुभ माना जाता है। सपने में भगवान गणेश जी का दिखने का मतलब सरल है जैसे सुख समृद्धि प्राप्त होना, परशानियो का कम होना, पुत्र की प्राप्ति होना, धन आना, सुख शांति आना, रुके हुए काम होना, काम बनना, वैभव और ऐश्वर्या की प्राप्ति आदि।

लेकिन अगर किसी व्यक्ति को सपने भगवान गणेश जी की टूटी हुई या खंडित मूर्ति दिखाई देती है तो वह आपके लिए शुभ संकेत बिलकुल भी नहीं है।

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उम्मीद करते हैं हमारा ये लेख Ganesh Ji Ki Murti खरीदते समय क्या ध्यान रखें में, आपको बहुत महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हुई होगी। यदि आप किसी जानकारी से संतुष्ट नहीं हैं तो कृपया कमेंट बॉक्स में हमें कमेंट करें।

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