Google Doodles: गूगल ने सुभद्रा कुमारी चौहान को Google Doodles में दी जगह

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Google Doodles ने भारत की पहली महिला सत्याग्रही सुभद्रा कुमारी चौहान (Subhadra Kumari Chauhan) को आज 16 अगस्त को उनकी 117वीं जयंती पर एक विशेष ग्राफिक (Google Boodles) में जगह देकर सम्मानित किया। Google Doodles पेज ने उनकी कविता का वर्णन किया है।

सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता और गद्य मुख्य रूप से महिलाओं को होने वाली कठिनाइयों जैसे जातिगत और लिंग भेदभाव को कुचल कर आगे बढ़ने का आभास करवाती है। Doodles पर सुभद्रा कुमारी का पोट्रे न्यूजीलैंड की अतिथि कलाकार प्रभा माल्या ने चित्रित किया है।

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1904 में उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के निकट निहालपुर में जन्मी सुभद्रा कुमारी चौहान एक स्वतंत्रता सेनानी भी थीं। आज का Google doodles उन्हें उनके योगदान और उपलब्धियों के लिए सम्मानित कर रहा है। Doodles ने सुभद्रा कुमारी चौहान की ग्राफिक तस्वीर लगायी है जिसमें वो साड़ी पहने, हाथ में कलम और कागज लिए बैठी हैं। चूँकि उन्होंने स्वतंत्रता पर कई कविताएं लिखी हैं इसलिए बैकग्राउंड में रानी लक्ष्मीबाई और स्वतंत्रता आंदोलन की एक झलक भी दर्शाई गई है।

Google Doodles: सुभद्रा कुमारी चौहान का बचपन

सुभद्रा कुमारी चौहान को बचपन से ही कविताएँ लिखने का शौक था। उन्होंने अपनी पहली कविता 9 साल की उम्र में एक ‘नीम’ के पेड़ पर लिखी थी। उनकी पांच प्रकाशित रचनाओं में दो कविता संग्रह ‘मुकुल’ और ‘त्रिधारा’ और तीन कथा संग्रह शामिल हैं।

उनके तीन कहानी संग्रह हैं मोती, उनमदिनी और सीधे-सादे चित्र। उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से स्वतंत्रता की लड़ाई में क्रांतिकारी बयान दिए। उनकी कुल मिलाकर 88 प्रकाशित कविताएँ और 46 लघु कथाएँ हैं। उनकी कविता “झाँसी की रानी” सबसे प्रसिद्ध कृति बनी हुई है। इसी कविता के माध्यम से सुभद्रा को लोकप्रियता मिली।

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महात्मा गांधी के ‘असहयोग आंदोलन’ में पहली महिला

सुभद्रा कुमारी चौहान ने न केवल अपनी भावनाओं और सपनों को कागज पर उतारा बल्कि अपने विचारों को वास्तविक जीवन का आधार भी बनाया। सुभद्रा देश की पहली महिला है जिन्होंने महात्मा गांधी के ‘असहयोग आंदोलन’ में भाग लिया। सुभद्रा कुमारी चौहान ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके कारण उन्हें कई बार कारावास की सज़ा भी मिली।

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वह दूसरों को भी अपने कार्यों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित करती रहीं। सुभद्रा कुमारी चौहान का 15 फरवरी 1948 को 44 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।

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