Punjab 95 Movie: नई दिल्ली, पंजाबी संगीत और अभिनय की दुनिया में अपने अभिनय और आवाज से लाखों दिलों में स्थान बना चुके दिलजीत दोसांझ एक बार फिर बड़े पर्दे पर धमाल मचाने के लिए तैयार हैं। उनका आगामी प्रोजेक्ट ‘पंजाब 95’ 2024 के बाद उनके फिल्मी करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह फिल्म 1995 में लापता हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है, जो पंजाब के उग्रवादी दौर के दौरान अपनी जान की बाजी लगाकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे थे।
फिल्म की कहानी – जसवंत सिंह खालरा की सच्ची कहानी
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Punjab 95 Movie की कहानी उस समय के पंजाब की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जब सिख आंदोलन और मानवाधिकारों का उल्लंघन बड़ी चिंता का विषय था। जसवंत सिंह खालरा ने 1984 से 1994 के बीच सैकड़ों अज्ञात शवों के सामूहिक दाह संस्कार के सबूत इकट्ठे किए थे। इन शवों का संबंध पंजाब में सिखों की बर्बरता और उनके उत्पीड़न से था। खालरा ने जो साक्ष्य जुटाए थे, वे मानवाधिकारों के उल्लंघन की गंभीर तस्वीर को उजागर करते थे।
इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों और शासन के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन उन्हें इसके बदले में बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी। 1995 में जसवंत सिंह खालरा अचानक लापता हो गए। सालों बाद यह सामने आया कि उन्हें पुलिस ने अपहरण किया था और बाद में हत्या कर दी थी। 2007 में, चार पुलिस अधिकारियों को उनके अपहरण और हत्या का दोषी पाया गया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई।
दिलजीत दोसांझ का किरदार – जसवंत की भूमिका में
दिलजीत दोसांझ इस फिल्म में जसवंत सिंह खालरा की भूमिका में नजर आएंगे। दिलजीत का अभिनय हमेशा ही दिल छूने वाला होता है, और उनकी इस भूमिका से फिल्म में गहरी संवेदनशीलता और सच्चाई की झलक देखने को मिलेगी। हाल ही में दिलजीत ने इस फिल्म का टीज़र जारी किया है, जिसमें वह जसवंत की जिंदादिली और संघर्ष को बड़े ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते नजर आ रहे हैं।
कब और कहां देखें Punjab 95 Movie?
Punjab 95 Movie, 7 फरवरी, 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ होगी। दर्शक बिना किसी कट के पूरी फिल्म देख सकते हैं। हालांकि, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से जुड़ी कुछ समस्याओं के कारण फिलहाल यह फिल्म भारत में रिलीज नहीं होगी।
पंजाब 95 – फिल्म का उद्देश्य और संदेश
‘पंजाब 95’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और सामाजिक संदेश है। यह फिल्म उस दौर की दर्दनाक सच्चाई को सामने लाती है जब पंजाब में उग्रवाद और मानवाधिकारों का उल्लंघन जोरों पर था। फिल्म की कहानी दर्शकों को यह समझाने का प्रयास करती है कि न्याय के लिए संघर्ष कभी समाप्त नहीं होता, और असल सच्चाई को सामने लाने की लड़ाई हमेशा जारी रहती है।
यह फिल्म न केवल जसवंत सिंह खालरा की बहादुरी की कहानी है, बल्कि यह उन सभी लोगों की याद भी दिलाती है, जिन्होंने पंजाब में अपने मानवाधिकारों के लिए संघर्ष किया और अपनी जान गंवाई। फिल्म में खालरा के संघर्ष के साथ-साथ पंजाब के उस काले दौर की भी सच्चाई सामने आएगी, जब राज्य और पुलिस के खिलाफ आवाज उठाने वालों को बर्बरता का शिकार बनाया गया था।