नई दिल्ली, इस शुक्रवार इमरान हाशमी की Ground Zero Film सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। यह फिल्म सिर्फ एक थ्रिलर नहीं, बल्कि भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक ऐतिहासिक मिशन की कहानी है। यह वही मिशन है जिसने देश के सबसे वांछित आतंकवादी गाजी बाबा को मौत के घाट उतारा था। गाजी बाबा वही आतंकी था जिसने 2001 में भारतीय संसद पर हमला कराया था।
गाजी बाबा कौन था?
गाजी बाबा, असली नाम राणा ताहिर नदीम, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का बड़ा कमांडर था। वो न केवल संसद हमले का मास्टरमाइंड था, बल्कि कई और बड़े हमलों का भी गुनहगार था। उसकी योजनाओं का मकसद भारत में धार्मिक तनाव फैलाना और कश्मीर को अस्थिर करना था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से उसे पूरा संरक्षण मिलता था।
कैसे मिला गाजी बाबा का सुराग?
2003 में, संसद पर हमले के करीब डेढ़ साल बाद, एक आत्मघाती हमलावर अंसार भाई श्रीनगर में पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान पता चला कि वह गाजी बाबा से सीधे संपर्क में था। हालांकि उसे गाजी बाबा का ठिकाना नहीं पता था, लेकिन उसने एक अहम जानकारी दी – एक बढ़ई के बारे में जो जैश आतंकियों के लिए छिपने की जगह बनाता था। इसी बढ़ई के जरिए बीएसएफ को एक ठिकाने की जानकारी मिली।
गुप्त ऑपरेशन की रोमांचक कहानी
बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी नरेंद्र नाथ धर दुबे के नेतृत्व में एक हाई-रिस्क ऑपरेशन शुरू हुआ। श्रीनगर के नूरबाग इलाके में रात के अंधेरे में टीम ने एक संदिग्ध मकान को घेरा। सुबह 4:10 बजे, घर की तीसरी मंजिल पर जब छापा मारा गया, तो सब कुछ शांत लगा। लेकिन तभी एक सिपाही को “आईना” शब्द सुनाई दिया। जैसे ही दीवार पर लगे शीशे को तोड़ा गया, अंदर से गोलियों की बौछार शुरू हो गई। एक जवान बलबीर सिंह शहीद हो गए और दुबे गंभीर रूप से घायल हुए।
गाजी बाबा का अंत
दुबे ने घायल हाथ से भी जवाबी फायरिंग की और एक ग्रेनेड को वापस फेंक दिया। जब सब शांत हुआ, तो एक नीली शर्ट में लाश मिली – यही था गाजी बाबा। यह ऑपरेशन बीएसएफ के इतिहास का सबसे बड़ा और सफल मिशन माना जाता है।
फिल्म बनाम हकीकत
Ground Zero Film इसी सच्ची घटना पर आधारित है। फिल्म में इमरान हाशमी बीएसएफ अफसर की भूमिका में हैं, जो दुबे से प्रेरित है। साथ ही सई तम्हाणकर, ज़ोया हुसैन और रजत कपूर भी अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म दर्शकों को एक ऐसी कहानी दिखाएगी, जो देशभक्ति और बलिदान से भरी है, लेकिन साथ ही उन जज्बातों को भी छुएगी जो ऐसी नौकरियों में जीने वाले लोग झेलते हैं।
याद रखें, असली जंग अब भी जारी है
Ground Zero Film यह याद दिलाती है कि भले ही एक आतंकवादी को मार गिराया गया हो, लेकिन आतंक के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। यह फिल्म सिर्फ एक घटना नहीं, एक संदेश है – देश के असली हीरोज को सलाम करने का।